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देवताओं की माता अदिति - वास्तु शास्त्र में है महत्व

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हिन्दू शास्त्रों में देवताओं की माता का नाम अदिति बताया गया है। अदिति के पुत्रों को आदित्य कहा गया है। हिन्दू धर्म के कुल 33 देवताओं में अदिति के 12 पुत्र शामिल हैं. वास्तु शास्त्र में इन अदिति और इन देवताओँ का बहुत ज्यादा महत्व है. आइये जानते है माता अदिति और उनके पुत्रों के बारे में. 




aditi mata in shastra 


12 sons of aditi -  विवस्वान्, अर्यमा, पूषा, त्वष्टा, सविता, भग, धाता, विधाता, वरुण, मित्र, इंद्र और त्रिविक्रम (भगवान वामन)। 


total 33 devtas group 


12 आदित्यों के अलावा 8 वसु, 11 रुद्र और 2 अश्विन कुमार मिलाकर 33 देवताओं का एक वर्ग (group) है।




समस्त देव ‍कुलों को जन्म देने वाली अदिति देवियों की भी माता है। अदिति को लोकमाता भी कहा गया है। अदिति के पति ऋषि कश्यप ब्रह्माजी के मानस पुत्र मरीची के विद्वान पुत्र थे। मान्यता के अनुसार इन्हें अनिष्टनेमी (ashtnemi) के नाम से भी जाना जाता है। इनकी माता 'कला' कर्दम ऋषि की पुत्री और कपिल देव की बहन थी।




अदिति के पुत्र विवस्वान् से वैवस्वत मनु का जन्म हुआ। महाराज मनु को इक्ष्वाकु, नृग, धृष्ट, शर्याति, नरिष्यन्त, प्रान्शु, नाभाग, दिष्ट, करुष और पृषध्र नामक 10 श्रेष्ठ पुत्रों की प्राप्ति हुई। 
श्रीकृष्ण की माता देवकी 'अदिति का का अवतार' बताई जाती हैं। 



प्राचीन भारत में अदिति माता की पूजा के बारे में बताया गया है लेकिन अब नही होता, वास्तु शास्त्र में अदिति का अपना स्थान है जो ईशान कोण में है, इसके अलावा इन पुत्रों का भी वास्तु मंड़ल में स्थान होता है. 

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